Skip to main content

ऐ ज़िन्दगी .....

ऐ ज़िन्दगी इतना बता,

तू इतनी खफा क्यूँ है ।।

जीते  रहने की मुझे,

दे रही यूँ सजा क्यों हैं ।।



दर्द को तबस्सुम में समेटे ,

जाने क्या सफ़रनामा लिख रहा हूँ ।।

अक्स में मसर्रत खोजता,

इक जनाज़ा लिए चल रहा हूँ ।।



ख्वाहिशो का मुक़म्मल होना,

अर्श में अफसून सा लगता है ।।

मेरे अश्क़ो की ना परवाह तुझे,

इतनी अय्यारी से आशियाना राख कर रही क्यों है ..



ऐ ज़िन्दगी इतना बता,

तू इतनी खफा क्यूँ है ।।

जीते  रहने की मुझे,

दे रही यूँ सजा क्यों हैं ।।

- डॉ. अंकित राजवंशी 

Comments

  1. There are many blogs I have read But when I read Your Blogs I have found such useful information, fresh content with such amazing editing everything is superb in your blog, Thank you so much for sharing this useful and informative information with us.

    North East Hospital is well known for Neuro Surgery, we have best neurosurgeon doctor In Patna. Get your appointment with our top Neuro Physician & Neurologist doctor In Patna, Bihar.
    Best Neuro Hospital in Patna

    ReplyDelete

Post a Comment

Thanks for dropping by... Do leave a comment in the Comments section below...

Popular posts from this blog

एक नयी सुबह....

आज फिर दिल में जगी एक उम्मीद है, की होगा फिर सवेरा, बसेगा मेरा आशियाना... खोया रहा हूँ बरसो से जीने की जिस कशमकश में, आज वही रात रौशनी दिखाने लगी है... जाने क्या आग थी जो जले जा रही थी, मुझे तो चिंगारी भी डराती रही है... तज़ब्जुब थे जो ये रेंगते सन्नाटे, आज वही बदलते प्रतीत हो रहे है... वक़्त की ये अँगडाई, बदलते मौसम, बारिश के छींटे, उगता सूरज, जाने क्यों सब सुहाने लगा है, शायद सच ही कहते है, बस नज़र के धोखे ही तो है... वर्ना,  ना ही कोई रंग है, ना कोई रूप, ना सौंदर्य, ना ही कोई कुरूप... आंखे बदल के देखो,  कितने हसीन है ये आँगन, मैंने भी आज ही जाना है इन्हें, ख़ुशी बाँटना ही इनका जीवन है, अचल, अटल, निष्पाप, निस्वार्थ... सिखा है आज इनसे मैंने, जीवन का सत्यार्थ, सेवा का चरितार्थ, की ख़ुशी जीवन में नहीं है, अपितु जीवन ही ख़ुशी में है... अनायास सोचने लगा की क्या मेरे जीवन में दुःख है? और फिर ज़ाले बुनती उस मकड़ी को देखकर खुद ही शर्मसार होने लगा,  तब जाना की ये दुःख नहीं छलावा मात्र है, अनजाने ही जिजीविषा की

When Bharat became India : India needs a wake-up

There has been a lot of whining and sedition over the condition of our country. What it has lead to is not a solution, but a mere mockery of the nation itself. But then, what is the solution? Is it a new constitution, a new society, or many new nations? All these are infatuations of our intellectual perverts. What India actually needs is, in fact, pretty simple. What India needs is a wake-up alarm. Its disappointing to see how the very identity of erstwhile historic ' Bharat ' has been twisted and distorted by the elite few in the formation of India we know today. Servility has became synonymous to India. Debauchery and treachery are rewarded. Corruption  is on the verge of getting a legal recognition, already enjoying a societal authentication. Is this what ' Bharat ' was all about? No, definitely not. Bharat was never about servility. It was about defiance and self-assertation. Servility of indians is a concept misquoted by the British for their interests, and l